DBMS में Primary Key का इस्तेमाल Table के प्रत्येक रिकॉर्ड (Row) को विशेष रूप से पहचानने (Identify) के लिए किया जाता है।
एक टेबल में Primary Key वह Column होता है जिसकी value कभी भी खाली (Null) नहीं हो सकती और न ही कभी दोहराई (Duplicate) जा सकती है।
Primary Key के प्रकार (Types of Primary Key)
Primary Key मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:-
- Simple Primary Key
- Composite primary Key
1. Simple Primary Key
जब Primary Key केवल एक ही Field (Column) से मिलकर बनी होती है, तो उसे Simple Primary Key कहते हैं

2. Composite Primary Key
जब एक से ज्यादा Fields (Multiple Columns) को मिलाकर एक Primary Key बनाई जाती है, तो उसे Composite Primary Key कहते हैं। ऐसा तब किया जाता है जब कोई एक अकेला कॉलम रिकॉर्ड को विशेष रूप से नहीं पहचान पाता।

Primary Key की विशेषताएं (Characteristics)
- यह data की पहचान (identification) के लिए बहुत जरूरी होती है।
- Primary Key हमेशा unique (अद्वितीय) होती है।
- किसी भी table में केवल एक ही Primary Key हो सकती है।
- यह single column या multiple columns (Composite Key) से बन सकती है।
- Composite Primary Key में एक से अधिक columns शामिल होते हैं।
- Primary Key में NULL value नहीं हो सकती।
उदाहरण (Example)
मान लीजिए हमारे पास एक ‘Employee’ टेबल है:
| Emp_ID (PK) | Name | Mobile |
| 101 | Amit | 9876578765 |
| 102 | Rahul | 9543223986 |
यहाँ Emp_ID एक Primary Key है। हम दो कर्मचारियों को एक ही ID नहीं दे सकते और न ही किसी कर्मचारी की ID का Column खाली छोड़ सकते हैं।
NOTE:- आपको “Primary Key in DBMS in Hindi” पोस्ट कैसी लगी आप हमें कमेंट के माध्यम से अवश्य बतायें। हमें आपके कमेंट्स का बेसब्री से इन्तजार रहता है। अगर आपका कोई सवाल या कोई suggestions है तो हमें बतायें हम उसको एक या दो दिन के अंदर यहाँ प्रकाशित करेंगे और हाँ पोस्ट शेयर जरूर करें।