HDLC in hindi

HDLC in hindi:-

HDLC का पूरा नाम high-level data link control (हाई लेवल डेटा लिंक कंट्रोल) है. तथा यह एक protocols का समूह है जिसका प्रयोग डेटा (सूचना) को एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क के मध्य ट्रांसमिट करने के लिए किया जाता है.

इसे ISO ने विकसित किया था.

इसे OSI model के layer 2 (डेटा लिंक लेयर) में प्रयोग किया जाता है.

HDLC एक bit oriented प्रोटोकॉल है जो कि वायरलेस तथा वायर्ड (wired) दोनों कम्युनिकेशन को सपोर्ट करता है तथा यह half duplex तथा full duplex दोनों कम्युनिकेशन मोड्स को सपोर्ट करता है.

यह HDLC यह सुनिश्चित करता है कि जो डेटा हम भेज रहे है वह सही destination तक error free (त्रुटी रहित) चला जायें तथा HDLC डेटा ट्रांसमिशन की गति को भी नियंत्रित करता है.

HDLC में डेटा एक यूनिट के रूप में व्यवस्थित होता है जिसे frames कहते है.
इसमें sender तथा reciever के मध्य डेटा frames के रूप में भेजा जाता है जिसमें फ्रेम्स के साथ trailer तथा header को भी भेजा जाता है.
header जो है वह hdlc address तथा hdlc control field को contain किये रहता है जबकि trailer फ्रेम के अंत में होता है जो कि CRC (cyclic redundancy check) को contain किये रहता है तथा यह CRC ट्रांसमिशन में होने वाली त्रुटियों को डिटेक्ट करता है.

Hdlc frame

types of hdlc stations in hindi:-

इसके तीन प्रकार होते है जो निम्न है:-

1:- primary station

2:- secondary station

3:- combined station

1:- प्राइमरी स्टेशन:– यह दूसरे स्टेशनों को नियंत्रित करता है ज्यादातर सेकेंडरी स्टेशन को नियंत्रित करता है.
यह सेकेंडरी स्टेशन को कमांड भेजकर सेकेंडरी स्टेशन के सभी कनेक्शनों को मैनेज करता है.

2:- सेकेंडरी स्टेशन:- secondary स्टेशन जो है वह प्राइमरी स्टेशन के भेजे गये कमांड्स का अनुसरण करती है.
यह केवल प्राइमरी स्टेशन का ही अनुसरण करती है और वह भी तब जब प्राइमरी स्टेशन से कोई सिग्नल आता है.

3:- कंबाइंड स्टेशन:– इस स्टेशन के अन्दर प्राइमरी तथा सेकेंडरी स्टेशन दोनों आते है. इसका खुद का अपना एक कनेक्शन होता है.
अर्थात इसमें कमांड्स को send तथा recieve करने के लिए किसी की permission (आज्ञा) की आवश्यकता नहीं होती है.

HDLC modes of communication in hindi:-

इसमें तीन प्रकार के कम्युनिकेशन मोड्स आते है जो निम्न है:-

1:- NRM (normal response mode)

2:- ARM (asynchronous response mode)

3:- ABM (asynchronous balance mode)

आजकल सबसे ज्यादा ABM का प्रयोग किया जाता है तथा NRM तथा ARM का प्रयोग बहुत ही कम होता है.

1:- NRM:- इसमें ट्रांसमिशन तब होता है जब सेकेंडरी डिवाइस ने प्राइमरी डिवाइस से permission ली हो.

2:- ARM:- इसमें सेकेंडरी डिवाइस प्राइमरी डिवाइस से आज्ञा लिए बिना भी ट्रांसमिशन शुरू कर सकती है.

3:- ABM:- इसमें दोनों डिवाइस (मोड) बराबर होते हैं. कोई भी ट्रांसमिशन बिना आज्ञा के हो जाता है.

अगर यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो तो कमेंट के द्वारा बताइए तथा इसे अपने दोस्तों के साथ share करें. धन्यवाद.

Summary (सारांश)

HDLC in hindi कंप्यूटर नेटवर्किंग का एक बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक है, जिसे आसान भाषा में इस आर्टिकल के जरिए समझाया गया है। इस लेख की मदद से आप सीखेंगे कि कैसे OSI मॉडल की Data Link Layer पर नेटवर्क के बीच डेटा को सुरक्षित और सही तरीके से भेजा जाता है। इस आर्टिकल/PDF में आपको निम्नलिखित मुख्य विषयों की पूरी जानकारी मिलेगी:

  • HDLC का पूरा नाम और इसका बुनियादी परिचय
  • यह प्रोटोकॉल किस तरह से काम करता है और इसके क्या फायदे हैं
  • Communication Modes जैसे Half Duplex और Full Duplex की जानकारी
  • HDLC Stations के अलग-अलग प्रकार जैसे Primary, Secondary और Combined स्टेशन
  • डेटा ट्रांसमिशन के दौरान Error Control और Flow Control की प्रक्रिया
कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए यह लेख Exam preparation में बहुत मददगार साबित होगा। यूनिवर्सिटी या सेमेस्टर परीक्षाओं में नेटवर्किंग से जुड़े सवालों के सटीक उत्तर लिखने के लिए आप इस कंटेंट की मदद ले सकते हैं। आसान शब्दों में समझाई गई यह जानकारी वाई-फाई, वायर्ड कनेक्शन और बिट-ओरिएंटेड प्रोटोकॉल जैसे कॉन्सेप्ट्स को हमेशा के लिए आपके दिमाग में स्पष्ट कर देगी।

2 thoughts on “HDLC in hindi”

Leave a Comment