recovery testing in hindi:-
रिकवरी टेस्टिंग को निम्न बिन्दुओं के आधार पर आसानी से समझा जा सकता है:-
1:-रिकवरी टेस्टिंग non-functional टेस्टिंग का एक प्रकार है.
2:-यह टेस्टिंग यह सुनिश्चित करने के लिए की जाती कि जब कोई एप्लीकेशन crash या fail हो जाती है तो वह कितनी जल्दी तथा कितने अच्छे तरीके से recover करती है.
3:-इस टेस्टिंग को करने के लिए एप्लीकेशन को खुद ही ख़राब या crash किया जाता है और फिर हर तरीके से इसमें रिकवरी टेस्टिंग की जाती है. जिससे टेस्टर को पता चलता है कि रिकवरी ठीक ढंग से हो पा रही है या नही.
Summary (सारांश)
Recovery testing in hindi एक बहुत ही महत्वपूर्ण Non-functional testing तकनीक है, जिसका उपयोग किसी Software Application की मजबूती और विश्वसनीयता (Reliability) को जांचने के लिए किया जाता है। जब कोई System अचानक Crash हो जाता है, Power failure होती है या कोई अन्य बड़ी तकनीकी समस्या आती है, तो यह टेस्ट सुनिश्चित करता है कि Application बिना किसी डेटा लॉस के कितनी तेजी और असानी से दोबारा शुरू (Recover) हो सकती है। इस लेख और PDF नोट्स के माध्यम से आप Recovery testing से जुड़े कई जरूरी विषयों को बहुत ही आसान भाषा में सीखेंगे।
- यह टेस्टिंग क्यों और कैसे की जाती है।
- Software Testing में इसके क्या लाभ हैं।
- किस प्रकार Developers और Testers मिलकर सिस्टम की कमियों को दूर करते हैं।
- Real-world scenarios में रिकवरी प्रक्रिया कैसे काम करती है।
निवेदन:-अगर आपके पास रिकवरी टेस्टिंग के बारें में और जानकारी है तो हमें comment के माध्यम से बताइए तथा इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ share करें.

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Sir ji web base Testing kya hote h ye bta dejiye sir pls pls
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