TQM क्या है तथा इसके फायदे क्या है?

TQM का पूरा नाम Total Quality Management होता है। यह एक ऐसी मैनेजमेंट तकनीक या method है जिसमें processes की quality, product की quality तथा सभी activities को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जाते हैं।

आसान शब्दों में कहें तो –

“TQM एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मैनेजमेंट तथा संगठन (organization) के सभी कर्मचारी मिलकर customer को बेहतर product और service देने के लिए लगातार प्रयास करते हैं।”

किसी भी organisation में ऊपर से लेकर नीचे तक सभी कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सभी कर्मचारी मिलकर product की quality को बेहतर बनाते हैं और customer को अच्छी service प्रदान करते हैं।

TQM किसी एक विशेष project या product पर आधारित नहीं होता है, बल्कि यह पूरी organisation की quality को बेहतर बनाने पर आधारित होता है।

इस प्रक्रिया में errors और defects को कम करने का प्रयास किया जाता है ताकि customer को बेहतर सुविधा और अच्छी quality का product मिल सके।

यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जब कोई customer किसी कंपनी के product से संतुष्ट होता है तो वह उस product और कंपनी के बारे में अन्य लोगों को भी बताता है। इससे कंपनी के customers बढ़ते हैं। इसलिए Total Quality Management किसी भी organisation के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।

TQM हमेशा customer की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर शुरू होता है और इसका उद्देश्य लगातार quality को बेहतर बनाना होता है।

TQM की अवधारणा को William Deming ने 1980 के दशक में विकसित किया था। हिंदी में इसे “सम्पूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन” कहा जाता है।

TQM Process क्या है?

TQM की प्रक्रिया को चार चरणों में विभाजित किया गया है जिसे PDCA Cycle कहा जाता है।

  1. ACT
  2. PLAN
  3. DO
  4. CHECK

tqm process in hindi

1. PLAN

यह PDCA चक्र का पहला चरण होता है। इस चरण में समस्याओं का विश्लेषण किया जाता है और उन्हें हल करने के लिए नए plans बनाए जाते हैं।

2. DO

इस चरण में बनाए गए plan को implement किया जाता है। जो भी बदलाव किए जाते हैं उन्हें future analysis के लिए document किया जाता है।

3. CHECK

इस चरण में पिछले चरण से प्राप्त data की जांच की जाती है। इसमें यह देखा जाता है कि जो plan बनाया गया था वह सफल हुआ या नहीं।

4. ACT

यह PDCA cycle का अंतिम चरण होता है। इस चरण में नए procedures को organisation में लागू किया जाता है और कर्मचारियों को इसकी जानकारी दी जाती है।

ध्यान रखने वाली बात यह है कि यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है।
ACT के बाद फिर से PLAN चरण शुरू हो जाता है।

TQM का प्रभाव

TQM का प्रभाव organisation की productivity और growth पर पड़ता है।

अगर product की quality बेहतर होगी तो productivity बढ़ेगी।
Productivity बढ़ने से cost कम होगी और profit बढ़ेगा।

जब profit बढ़ता है तो—

  • business का विस्तार होता है
  • jobs के अवसर बढ़ते हैं
  • investment बढ़ता है
  • market competition भी बढ़ता है

Principles of TQM in Hindi – TQM के सिद्धांत

TQM के मुख्य सिद्धांत निम्नलिखित हैं—

1. Customer Focus

किसी भी organisation में decisions customer की आवश्यकताओं और satisfaction को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। ग्राहक तभी संतुष्ट होता है जब उसे अच्छी quality का product उचित कीमत पर मिलता है।

इसीलिए कहा जाता है –

“Customer is King”

2. Continuous Improvement

TQM का एक मुख्य उद्देश्य organisation की सभी activities में लगातार सुधार करना है। product और service की quality को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाते हैं।

3. Employee Involvement

TQM में कर्मचारियों की भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। product की quality को बेहतर बनाने में कर्मचारियों की भूमिका अहम होती है।

इसमें organisation के सभी लोग शामिल होते हैं –
manager से लेकर चौकीदार तक, क्योंकि सभी की अपनी जिम्मेदारियां होती हैं।

4. Techniques and Tools

Organisation में modern techniques और tools का उपयोग quality को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। कई बार अलग-अलग tools को एक साथ उपयोग करना अधिक लाभदायक होता है।

5. Decision Making

Organisation में लिए जाने वाले निर्णय facts और data के आधार पर होने चाहिए, न कि emotions या personal issues के आधार पर।

6. Communication

किसी भी business की सफलता के लिए communication बहुत आवश्यक होता है। अगर customers और employees के बीच सही communication नहीं होगा तो business को नुकसान हो सकता है।

Advantages of TQM in Hindi (TQM के लाभ)

TQM के कई लाभ होते हैं –

  1. इससे customer satisfaction बढ़ता है क्योंकि product और services की quality बेहतर होती है।
  2. Product में defects (कमियां) कम हो जाती हैं।
  3. Organisation को market की जरूरतों का बेहतर पता चलता है।
  4. Production cost कम हो जाती है।
  5. Company की reputation और profit दोनों बढ़ते हैं।

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